अभिव्यक्ति
( कविता, कहानियां एवं लेख )
बुधवार, 17 नवंबर 2010
सहारा
मैं परेशां हो जाता हूँ जब
इस तनहाई से भागकर
तुम्हारे पास आता हूँ
जब तुम्हारा साथ न पाकर
मायूस हो जाता हूँ
जब धड़कने रुकने लगती हैं
साँस थमने लगती हैं
जब तुम अपनी बाँहों का सहारा दो
देखो मेरी जिन्दगी को जरुरत है अब ......
2 टिप्पणियां:
संजय भास्कर
17 नवंबर 2010 को 4:23 am बजे
बहुत तराशी हुई रचना है, आनंद आगया.
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Anamikaghatak
17 नवंबर 2010 को 6:12 am बजे
bahut sundar rachana ....manbhavan
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बहुत तराशी हुई रचना है, आनंद आगया.
जवाब देंहटाएंbahut sundar rachana ....manbhavan
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