आप सभी को दीपो के इस पर्व पर ढेरों शुभकामनाये माँ महालक्ष्मी आप सभी को धन धान्य से परिपूरित करे आप सभी आने वाले जीवन मैं हँसते रहे चाहे आमोद न रहे !
दीपावली शुभ हो!
गुरुवार, 4 नवंबर 2010
शनिवार, 12 सितंबर 2009
लंबे दिन
याद हे
पहले के दिन कितने
बड़े होते थे
अम्मा तीन बार जगाती थी
तब कहीं ७ बजा करते थे
नाश्ता करके
उछलते हुए स्कूल जाना
रास्ते मैं ठेले से केले खींचकर खाना
आधी छुटी में स्कूल के बाहर
खड़े ठेले से चाट खाना
छुटी होते ही दोड़ते हुए
घर की तरफ़ भागना
कितना मजा था
उन दिनों का
अम्मा का दौड़ा दौड़ा कर खाना खिलाना
और समय होता था केवल २
वाकई पहले के दिन कितने
बड़े होते थे
थक कर जब अम्मा की गोद मैं
सोया करते थे
पर आज न वो दिन रहे
न ही अम्मा रही
कब सुबह, कब रात हुयी
पता ही नही चलता
न वो गोदी रही
न वो प्यार रहा
याद हे
पहले के दिन कितने
बड़े होते थे ....... .....
पहले के दिन कितने
बड़े होते थे
अम्मा तीन बार जगाती थी
तब कहीं ७ बजा करते थे
नाश्ता करके
उछलते हुए स्कूल जाना
रास्ते मैं ठेले से केले खींचकर खाना
आधी छुटी में स्कूल के बाहर
खड़े ठेले से चाट खाना
छुटी होते ही दोड़ते हुए
घर की तरफ़ भागना
कितना मजा था
उन दिनों का
अम्मा का दौड़ा दौड़ा कर खाना खिलाना
और समय होता था केवल २
वाकई पहले के दिन कितने
बड़े होते थे
थक कर जब अम्मा की गोद मैं
सोया करते थे
पर आज न वो दिन रहे
न ही अम्मा रही
कब सुबह, कब रात हुयी
पता ही नही चलता
न वो गोदी रही
न वो प्यार रहा
याद हे
पहले के दिन कितने
बड़े होते थे ....... .....
रविवार, 26 जुलाई 2009
कौन है ....
हमेशा वह नही होता
जो होता है मन मैं
दाना डालता हूँ चिडिओं को
खाता कौन है ...
बड़े सहेज कर ईमारत
खड़ी की है हमने
देखना है
रहता कौन है .....
सोचता हूँ बिना कहे
वो सब समझ जाएगा
मगर समझता कौन है ......
किए हैं मैंने बहुत उपाए
जीने के लिए
देखना है
अब जीता कौन है ......
जो होता है मन मैं
दाना डालता हूँ चिडिओं को
खाता कौन है ...
बड़े सहेज कर ईमारत
खड़ी की है हमने
देखना है
रहता कौन है .....
सोचता हूँ बिना कहे
वो सब समझ जाएगा
मगर समझता कौन है ......
किए हैं मैंने बहुत उपाए
जीने के लिए
देखना है
अब जीता कौन है ......
मंगलवार, 19 मई 2009
शिकायत
तुम्हे मेरे साथ आने की
जरूरत क्या है
मैं गिर जाऊं उठाने की
जरूरत क्या है
ठोकर खाऊँ हज़ार बार
सहारा देने की जरूरत क्या है
लाख जख्मी होऊं
मरहम लगाने की जरूरत क्या है
तुमने ही तो कहा है
प्यार है हमेशा रहेगा
प्यार जताने की जरूरत क्या है
- विशु
यह कविता मेरी बहुत अच्छे दोस्त के द्वारा लिखी है
जरूरत क्या है
मैं गिर जाऊं उठाने की
जरूरत क्या है
ठोकर खाऊँ हज़ार बार
सहारा देने की जरूरत क्या है
लाख जख्मी होऊं
मरहम लगाने की जरूरत क्या है
तुमने ही तो कहा है
प्यार है हमेशा रहेगा
प्यार जताने की जरूरत क्या है
- विशु
यह कविता मेरी बहुत अच्छे दोस्त के द्वारा लिखी है
सोमवार, 4 मई 2009
एक शाम .....
शाम जब आती है
दिवाकर वक्त के परों पर
बैठकर
धीरे धीरे मुस्कराता हुआ
चला जाता है
तो तुम बहुत याद
आते हो
और उस लालिमा के
साथ ये दिल
भी डूबने लगता है .....
शाम के आने की
सूचना देते पक्षी
जब लौटते हैं
घोसलों को दरख्तों के
लंबे होते साये
पड़ते हैं जमीनों पर
तो अचानक ही तुम्हारी
याद आ जाती है
व्यतीत होता एक और दिन
समाप्त हो जाता है
और एक आशा आंसूं बनकर
आँखों मैं मुस्कराने लगती है
जब शाम आती है .........
दिवाकर वक्त के परों पर
बैठकर
धीरे धीरे मुस्कराता हुआ
चला जाता है
तो तुम बहुत याद
आते हो
और उस लालिमा के
साथ ये दिल
भी डूबने लगता है .....
शाम के आने की
सूचना देते पक्षी
जब लौटते हैं
घोसलों को दरख्तों के
लंबे होते साये
पड़ते हैं जमीनों पर
तो अचानक ही तुम्हारी
याद आ जाती है
व्यतीत होता एक और दिन
समाप्त हो जाता है
और एक आशा आंसूं बनकर
आँखों मैं मुस्कराने लगती है
जब शाम आती है .........
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