सोमवार, 10 जून 2013

कौन...??

दोस्तों को दुश्मन बनाया है किसने ..
शमशान में लाशों को पहुँचाया है किसने..

किसने किसको, किसको है देखा ..
न देखा है हमने, न देखा है तुमने...

हुयी शाम, और ये रात है आयी..
किसने, ये तारों की महफ़िल सजाई ...

सोचते-सोचते में सो गया हूँ ..
रात की कालिमा में मैं खो गया हूँ..

किसने इस कालिमा को लालिमा बनाया ..
किसने मुझको फिर से जगाया..

किसने किसको, किसको है देखा ..
न देखा है हमने, न देखा है तुमने...

किसने, हमको और तुमको बनाया ....
बनाकर मिटाया और फिर से बनाया ...

किसने नफरत और द्वेष बनाया ...
किसने प्रेम का सन्देश सिखाया ..

किसने चमन को है मरघट बनाया ..
न जाना है तुमने, न जाना है मैंने..

किसने किसको, किसको है देखा ..
न देखा है हमने न, देखा है तुमने... ??????

10 टिप्‍पणियां:

  1. वाह . बहुत उम्दा,सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति
    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
    http://madan-saxena.blogspot.in/
    http://mmsaxena.blogspot.in/
    http://madanmohansaxena.blogspot.in/
    http://mmsaxena69.blogspot.in/

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    1. Aabhar adaraniya Madan Mohan Saxena jee aapka... avashya aapke blog p aaunga.. thanyawad...

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  2. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन यात्रा रुकेगी नहीं ... मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  3. मुझे आप को सुचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि
    आप की ये रचना 14-06-2013 यानी आने वाले शुकरवार की नई पुरानी हलचल
    पर लिंक की जा रही है। सूचनार्थ।
    आप भी इस हलचल में शामिल होकर इस की शोभा बढ़ाना।

    मिलते हैं फिर शुकरवार को आप की इस रचना के साथ।


    जय हिंद जय भारत...

    कुलदीप ठाकुर...

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    1. Bahut Bahut Aabhar aapka ki meri rachna ko Nayee Purani Halchal me shamil karne ke liye.. .. dhanyawad..

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