गुरुवार, 25 सितंबर 2014

हमसफर को मेरा धन्यवाद

जीवन के आपाधापी मे
अच्छा और अच्छा होने की ललक मे
अम्मू से आमोद बनने
के सफर मे
जो भी मिला उन हमसफर को मेरा
धन्यवाद !
साथ साथ चलते हुये
न जाने कितने स्नेह
कितने आत्मीयजन मिले
जिनका प्रतिबिंब आँखों मे
मेरी साँसों मे, खून मे
धमनियों में
अविरल गतिमान है
उन हमसफर को मेरा
धन्यवाद !
सफर के इस पड़ाव में
कितने हमसफर हमसे रूठे
उनकी हर बातें हमसे रूठी
उनका क्रोध, उनका प्यार
हमे मिला
उन हमसफर को मेरा
धन्यवाद !
जो मेरा था वो उनका था
उनकी सीख जो आज हमारी है
उन सभी का आशीर्वाद
जिसने मुझे यहाँ तक पहुंचाया
उनकी मेहनत
जिसने ये दिन दिखाया
उन हमसफर को मेरा
धन्यवाद !
वाकई उनके बिना ये
सफर अधूरा था
अपूर्व था
आज इस मंजिल तक जिसने
पहुंचाया उन सभी हमसफर को मेरा
धन्यवाद !


1 टिप्पणी:

  1. अच्छा लगा आपके ब्लॉग पर आकर !
    आपके ब्लॉग को फॉलो कर रहा हूँ
    आपसे अनुरोध है की मेरे ब्लॉग पर आये और फॉलो करके सुझाव दे

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