बुधवार, 29 अप्रैल 2009

सम्बन्ध .....

कुछ कह रही हैं
आपके सिने की धड़कने
मेरा नही तो
उनका कहा मानिये
हर शाम तरसती है
आँखों मैं लिए सपना
आमोद को कोई
तो खाए अपना
आमोद को पतझडों का
सहारा ही बहुत था
तू बता तुझे
बहारों से क्या मिला
जीवन वो भी क्या जीवन है
जिसने विष का घूंट न पीया
आमोद सम्बन्ध नही है
की जोड़कर तोड़ दिया जाए
इस तरह से रोने से गम
और घनेरा होगा
रत कसे बाद
सबेरा होगा
वक्त गर तुझसे
खफा है तो तू अफ़सोस न कर
आमोद किसी का न हुआ
तो कैसे
वो तेरा होगा ...... ....... .....

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