शनिवार, 11 दिसंबर 2010

ख्वाब

रोते, हँसते, गाते मैंने देखा है
उसे अपने मैं पलते मैंने देखा है
हमारी दुआंओ से उसकी जिन्दगी रोशन है
उसकी आदतों को खुद मैं ढलते मैंने देखा है
न जाने कौन सा स्वप्न आवाज देता है
मैंने अपने आपको नींदों मैं चलते देखा है
मुझे मालूम है तेरी दुआएं साथ रहेंगी
मुश्किलों को हाथों मलते मैंने देखा है
मेरी खामोशियों मैं तैरती है तेरी आवाजें
मैंने अपना दिल मचलते देखा है
बदल जायेगा सब कुछ बदल छटेगा
मुझी आँखों से ख्वाब जलते मैंने देखा है .

1 टिप्पणी:

  1. Bhai sahab aapne kabhi bataya nahin ke...
    kaun hai jo aapko khwabon mein bhi pareshan kar raha ?
    aap bolo to uski waat laga doon.....

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