सोमवार, 15 नवंबर 2010

कभी सोचा न था

यूँ तो तक़दीर ने देखे हैं मोड़ कई
जिन्दगी यूँ मुड़ेगी कभी सोचा न था
कई ज़माने से प्यासा हूँ मैं यहाँ
ओस से प्यास बुझेगी कभी सोचा न था
यूँ तो फिरते हैं कई लोग यहाँ
गुदरी मैं लाल मिलेगा कभी सोचा न था
किस्मत ने दी हर जगह दगा
मुकद्दर यूँ ही चमकेगी कभी सोचा न था
खून करे हैं सभी के अरमानों के हमने
खून मेरा भी होगा कभी सोचा न था .......

2 टिप्‍पणियां:

  1. क्या बात है..बहुत खूब....बड़ी खूबसूरती से दिल के भावों को शब्दों में ढाला है.

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